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Storybook paragraphs containing word (51)

"मालू ने देखा, कालू ने गड्ढा खोदा हुआ था। खुदी मिट्टी में थे मोटे-मोटे आलू!"
आलू-मालू-कालू

"स़िर्फ टिंकु जागा हुआ था।"
सो जाओ टिंकु!

"वह जानना चाहता था कि रात में उसे कौन मिल सकता है। ऊपर आसमान में टिंकु ने चाँद देखा। सफ़ेद, जगमग करता गोल चाँद जो मुस्कराता हुआ उसे देख रहा था। वह बहुत ख़ुश हुआ। रात बहुत सुंदर है, टिंकु ने सोचा।"
सो जाओ टिंकु!

"एक पंछी उड़ता हुआ आया।"
सो जाओ टिंकु!

"आगे बढ़ते ही अर्जुन को अचानक महसूस हुआ कि उसके पहिये पर दबाव कम होने लगा है, उसके सामने की भीड़ छँटने लगी है और वह बहुत आराम से आगे बढ़ गया है, “जाने दो अर्जुन भाई,” उसके चाचा ने कहा।"
उड़ने वाला ऑटो

"क्या हुआ है?"
पूरी क्यों फूलती है?

""भारत छोड़ो!" पुट्टी की आँखें हैरानी से और फैल गयीं। "हमने इतिहास में पढ़ा है! पुट्टा, ये वह आंदोलन है जो 1942 में शुरू हुआ था, इसका मतलब है कि 1942 में ही...""
मुत्तज्जी की उम्र क्या है?

""जरूरी तो नहीं," पुट्टा ने कहा, "क्योंकि मुत्तज्जी ने यह तो नहीं कहा कि उनका पहला बच्चा, उनकी शादी के 2 साल बाद पैदा हुआ था। उन्होंने तो बस यह कहा कि जिस साल उनकी शादी हुई उसी साल मैसूर में एक बांध बनाया गया था।""
मुत्तज्जी की उम्र क्या है?

"गांधीजी का भाषण (1 942 ) - 8 अगस्त 1942 के दिन, बंबई के ग्वालिया टँक मैदान में गांधीजी ने 'भारत छोड़ो भाषण' दिया था। गांधीजी ने लोगों से कहा कि उन्हे अंग्रेज़ी शासन के ख़िलाफ लड़ना होगा। इसके लिए उन्हे हिंसा नहीं, बल्कि उनके साथ असहयोग करना होगा। इसके 5 साल बाद, 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेज़ो का शासन खत्म हुआ और भारत आज़ाद हुआ। आज उसी शांत क्रांति की स्मृति में ग्वालिया टैंक मैदान को अगस्त क्रांति मैदान कहा जाता है !"
मुत्तज्जी की उम्र क्या है?

"2. दाँडी में गाँधी जी और उनके साथियों ने समुद्र तट से नमक उठाया और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ़्तारी के बाद असहयोग आन्दोलन शुरू हुआ और पूरे भारत में लोगों ने स्कूल, कॉलेज व दफ़्तरों का बायकॉट किया।"
स्वतंत्रता की ओर

"पच्चा ने समझाते हुए बताया, “बीज सभी आकृति और आकार के होते हैं।“ इंजी सेब का बचा हुआ हिस्सा खाने में जुटा था। “क्या ये सभी पेड़ों के बच्चे हैं?" पोई ने पूछा।"
आओ, बीज बटोरें!

"स्टेल्ला ने अपने दोनों हाथ हवा में हिलाए। इसका मतलब हुआ कि वो ताली बजा रही थी। परवेज़ ने संकेत भाषा के कई शब्द उसे सिखा दिए थे जो उसकी शीला मिस ने सुकर्ण स्कूल में सिखाये थे।"
कोयल का गला हुआ खराब

"मकड़ा जाले से झूलता हुआ नीचे गोजर के पास उतरा।"
एक सौ सैंतीसवाँ पैर

"एक अजीब सा काला गुटका उससे चिपका हुआ है।"
जादुर्इ गुटका

"पूरे शहर की फेंकी हुई चीज़ें और गन्दगी से भरा हुआ रहता था।"
दीदी का रंग बिरंगा खज़ाना

"मुनिया जानती थी कि एक पंख वाले उस विशालकाय गजपक्षी ने घोड़े को नहीं निगला है। हाँ, वह इतना बड़ा तो था कि एक घोड़े को निगल जाता, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि उसने उसे निगल ही लिया था! नटखट झील के पास वाले उस जंगल से ग़ायब हुआ था जहाँ वह गजपक्षी रहता था। अधनिया गाँव में दो घोड़ों - नटखट और सरपट द्वारा खींचे जाने वाली केवल एक ही घोड़ागाड़ी थी। जंगल के अंदर बसे इस छोटे से गाँव में पीढ़ियों से लोगों को इस विशालकाय एक-पंख गजपक्षी के बारे में मालूम था। चूँकि वह किसी के भी मामले में अपनी टाँग नहीं अड़ाता था, इसलिए गाँव का कोई भी बंदा उसे छेड़ता न था।"
विशालकाय एक-पंख गजपक्षी

"पर मुनिया जल्द ही यह जान गयी कि वह शर्मीला और घासफूस खाने वाला एक शान्त पक्षी है। वह बस झील के किनारे लगे पौधे और पत्तियाँ चबाता रहता। मुनिया को महसूस हुआ कि उसमें और उस गजपक्षी में कुछ समानता है। सही तो है, विशालकाय एक-पंख गजपक्षी उड़ नहीं सकता था और मुनिया दौड़ नहीं सकती थी! गाँव के बाकी सारे बच्चे उसके लँगड़ाने का मज़ाक उड़ाते और अपने खेलों में उसे शामिल न करते। इसलिए उसे अकेले रहना ही अच्छा लगता।"
विशालकाय एक-पंख गजपक्षी

"माँ ने मेरा हाथ कसकर पकड़ा हुआ है।"
स्कूल का पहला दिन

"साबुन-पानी का हुआ बहाना।"
चुन्नु-मुन्नु का नहाना

"ध्यान हुआ चंदू का भंग"
सबरंग

"बुरा हुआ है, बुरा हुआ"
सबरंग

"पड़ा हुआ था बुड्ढा भू पर"
सबरंग

"विवान यह सुनकर बहुत खुश हुआ और वह दोनो मौसी के साथ हाल के पीछे एक कमरे में गये।"
संगीत की दुनिया

"काटो ठंड से काँपते हुए धूप में अपने को सुखाने की कोशिश कर रहा था। पास में विक्की चुपचाप बैठा हुआ था। जब काटो के बाल थोड़ा सूख गये और शरीर में थोड़ी गर्मी आ गयी, वह बोल उठा, “कितना मज़ा आया! जब मेरे साथी इस किस्से को सुनेंगे तो उन्हें विश्‍वास ही नहीं होगा।” काटो को लग रहा था मानो वह एक बहुत बड़ा हीरो और जहाज़ का जाँबाज़ कप्तान बन गया हो!"
नौका की सैर

"ऐनक ऊन में लिपटी पड़ी थी। उनकी कलम के बगल में, फोन के नीचे, मेज़ के ऊपर। और वहीं पर मुझे आधा खाया हुआ लड्‌डू भी मिला।"
नानी की ऐनक

""क्या हुआ दादाजी, आज आप अख़बार क्यों नहीं पढ़ रहे हैं?" एक सुबह गुल्ली ने दादाजी से पूछा।"
गुल्ली का गज़ब पिटारा

""क्या हुआ मंगल चाचा?" गुल्ली ने पूछा। वे परेशान लग रहे थे।"
गुल्ली का गज़ब पिटारा

"वह झपटता हुआ लुहार के पास पहुँचा और बोला,"
काका और मुन्नी

"(Collage) हैं। कोलाज, अलग-अलग चीज़ों के टुकड़ों को जोड़कर एक नयी तस्वीर को बनाने का एक तरीका होता है। यह चीज़ें हाथों से बनी या इस किताब की तरह छपा हुआ काग़ज, अखबार और मैगज़ीन की कतरनें, पुराने कार्ड, छायाचित्र, कपड़ा, रिबन, सूखे फूल या पत्ते, या आसानी से मिल जानेवाली कोई भी चीज़ हो सकती है!"
काका और मुन्नी

"इस पृष्ठ में चार तत्वों वायु, जल, पृथ्वी और दहकते हुए सूर्य को दर्शाया गया है। जैसे इस किताब में कागज़ के टुकड़ों का इस्तेमाल हुआ है वैसे ही तुम कागज़ के टुकड़े"
काका और मुन्नी

"सच कहूँ तो ख़ुद मैं भी यह बात जानना चाहता हूँ और मेरे मन में भी वही सवाल हैं जो लोग तुम्हारे बारे में मुझसे पूछते हैं। हाँ, मैंने पहले दिन ही, जब तुम कक्षा में आई थीं, गौर किया था कि तुम एक ही हाथ से सारे काम करती हो और तुम्हारा बायाँ हाथ कभी हिलता भी नहीं। पहले-पहल मुझे समझ में नहीं आया कि इसकी वजह क्या है। फिर, जब मैं और नजदीक आया, तब देखा कि कुछ है जो ठीक सा नहीं है। वह अजीब लग रहा था, जैसे तुम्हारे हाथ पर प्लास्टिक की परत चढ़ी हो। मैं समझा कि यह किसी किस्म का खिलौना हाथ होगा। मुझे बात समझने में कुछ समय लगा। इसके अलावा, खाने की छुट्टी के दौरान जो हुआ वह मुझसे छुपा नहीं था।"
थोड़ी सी मदद

"पता है जब मैंने तुम्हें बस में देखा तो मैं बहुत हैरान हुआ था। मुझे इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि मेरे पिता और तुम्हारे पिता एक ही जगह काम करते हैं! लेकिन मैं बहुत खुश हूँ कि तुम दफ़्तर की पिकनिक में आईं, क्योंकि पिछले साल जब हम दफ़्तर की पिकनिक पर गए थे तब उसमें मेरी उम्र का कोई भी बच्चा नहीं था और बड़ों के बीच अकेले-अकेले मुझे ज़रा भी अच्छा नहीं लगा था। मैं बहुत ऊब गया था।"
थोड़ी सी मदद

"ओह! मुझे अभी अहसास हुआ है कि मैंने तुम्हें जो दो आखीरी पत्र लिखे हैं, उनमें मैंने तुम्हारे प्रॉस्थेटिक हाथ के बारे में बात ही नहीं की। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैं इसके बारे में बिल्कुल ही भूल गया था और मेरे पास तुम्हें बताने के लिए और भी बातें थीं। मज़ेदार बात यह है कि तुम्हारे हाथ को लेकर अब मेरे मन में कोई सवाल नहीं उठते। न जाने क्यों!"
थोड़ी सी मदद

"ठंड में कल्लू दाँत किटकिटाता हुआ उठा, “सूरज? कहाँ है सूरज?”"
कल्लू कहानीबाज़

"हाँ, सबसे बुरा तो तब हुआ था जब वह परसों देर से पहुँचा था। 26 जनवरी के कार्यक्रम का रिहर्सल था और जब वह स्कूल के अहाते में पहुँचा तो राष्ट्रगान की “जय जय जय जय हे” वाली पंक्ति गाई जा रही थी। और कल्लू को वहाँ सामने होना चाहिये था। दामू, मुनिया, और सरू के साथ गाने की अगुआई करते हुए।"
कल्लू कहानीबाज़

"हाय मेरी किस्मत, अपने पर कुढ़ता हुआ रंभाती भैसों से बच के निकला। यहाँ जान के लाले पड़े हैं और मैं पहुँचा भी तो कहाँ? बदरी और उसकी मोटी भैसों के पास घास चरने। हाँफता, मिट्टी में फिसलता वह किसी तरह से वहाँ से भागा। बदरी, भैसों का अजीबोग़रीब मालिक अपनी मन भर की पगड़ी पहने डंडा लहरा रहा था और मोटी मूछों के पीछे मुस्करा रहा था।"
कल्लू कहानीबाज़

"लेकिन हिटलर की योजना को अधिक कामयाबी नहीं मिली, और इसका आंशिक कारण ध्यान चंद व भारतीय हॉकी टीम थी। पूर्व का तूफ़ान शांत नहीं हुआ था और उसने हंगरी, अमेरिका, जापान और फ़्रांस को हराते हुए फ़ाइनल में प्रवेश किया। जर्मनी भी फ़ाइनल में पहुँच चुका था, और हिटलर ने सोचा कि जर्मनी की टीम पूर्व से आए इन भूरे लोगों को अपना वास्तविक स्थान दिखा देगी। और फ़ाइनल में जर्मनी ने एक गोल कर दिया था, जो चारों टीमें मिलाकर भारत के ख़िलाफ़ अब तक नहीं कर पार्इ थीं।"
ध्यान सिंह  'चंद'  : हॉकी के जादूगर

"पेड़ों पर चढ़कर कच्चे आम तोड़ना 
मोरू को अच्छा लगता था। वह टहनियों 
पर रेंगते हुए ऐसी कल्पना करता मानो किसी घने जंगल में चीता हो। उसे कीड़े पकड़ना भी पसंद था। चमकदार पन्नी सी चमचमाते सर वाली हरी-नीली घोड़ा मक्खी, पतला और चरचरा सा टिड्डा, पीली तितली जिसका रंग पीले गुलाल सा उसकी उंगलियों पर उतर आता था। मोरू को पतंग उड़ाना भी अच्छा लगता था। जितनी ऊँची उड़ सके उतना अच्छा। सबसे ऊँची छतों पर चढ़ कर वह अपनी पतंग बादलों से कहीं ऊपर तक उड़ाता जैसे वह एक चमकता हुआ पक्षी हो जो सूरज तक पहुँचने की कोशिश कर रहा हो।"
मोरू एक पहेली

"शिक्षक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने मोरू के गाल पर एक तमाचा मारा। मोरू का गाल सुर्ख लाल हो गया। अचानक ही उसकी आँखों से गर्म आँसू फूट पड़े। वह खड़ा हुआ और कमरे से बाहर भागा। बरामदे से नीचे उतर, धूल भरे मैदान को पार करके वह टूटे फाटक से सीधे बाहर निकल गया।"
मोरू एक पहेली

"अगले दिन मोरू ने स्कूल छूटने का इन्तज़ार किया। जब सब बच्चे जा चुके थे और शिक्षक अकेले थे, मोरू चुपचाप अन्दर आया और दरवाज़े पर आ कर खड़ा हो गया। शोरोगुल और हँसी मज़ाक के बगैर स्कूल कुछ भुतहा सा लग रहा था। शिक्षक ने नज़र उठाई और बोले, “अच्छा हुआ जो तुम आ गये। मुझे तुम्हारी मदद चाहिये।” मोरू को अचरज हुआ। शिक्षक क्या मदद चाहते होंगे? उनके पास तो मदद के लिये स्कूल में बहुत से बच्चे थे। वे धीरे से बोले, “क्या तुम किताबों को छाँटने में मेरी मदद कर सकते हो?”"
मोरू एक पहेली

"मोरू ने उन्हें कतार में खड़ा करवाया - सबसे छोटे बच्चे एक छोर पर और लम्बे वाले दूसरे छोर पर। उसने उन्हें हाथों में अंक पकड़ाए। अब सब आसान हो गया। जैसे छोटे और लम्बे बच्चों के साथ हुआ कि किसे कहाँ खड़ा होना था वैसे ही अंकों के साथ करना था।"
मोरू एक पहेली

"वहाँ मोरू नज़र आ रहा था। वह सर झुकाये ध्यान से अपनी कॉपी में कुछ देख रहा था। उसके माथे पर सोच की रेखाएँ दिख रही थीं और उसकी आँखों में गहरी तल्लीनता थी। वह अपनी उम्र के बाकी लड़कों के साथ गणित के मुश्किल सवाल हल करने में लगा हुआ था। शिक्षक की नज़र भी बाहर गई और वह मोरू की माँ की तरफ़ देख कर हल्के से मुस्कराये।"
मोरू एक पहेली

"मुझे लगता है कि आकाश में एक बड़ा दानव, शायद कुंभकर्ण, सोया हुआ है,"
दीदी, दीदी, बादल क्यों गरजते हैं?

"आधा सोया हुआ रसोइया जल्दी से तैयार होकर राजा के पास दौड़़ा।"
कोट्टवी राजा और उनींदा देश

"अच्छा हुआ जो हम इस 'लॉयनफ़िश’ से दूर रहे। इसके कांटे चुभने से चढ़ सकता है ज़हर!"
गहरे सागर के अंदर!

"पैरेटफ़िश के दांत तोते की चोंच जैसे नज़र आते हैं। अपने बड़े और मज़बूत दांतों से ये मछलियां सख़्त प्रवाल पर जमी काई खुरच कर खाती हैं। कुछ किस्म की पैरेटफ़िश तो हरियाली के साथ थोड़ा बहुत प्रवाल भी खुरंच कर खा जाती हैं। खुरंच कर खाया हुआ प्रवाल इनकी आंतों से बाहर आते-आते बारीक पिस चुका होता है, और लहरों के साथ किनारे आकर ख़ूबसूरत 'बीच’ यानी समुद्रतट की सफ़ेद रेत का हिस्सा बन जाता है।"
गहरे सागर के अंदर!

"जो कभी एक बिना-पेड़ों-वाली-जगह हुआ करती थी, ऐसी बँजर और बेकार जगह अब एक शानदार, हरियाली से भरी कई-पेड़ों-वाली-जगह बन गई थी।अब यहाँ हरे-भरे पेड़ लहलहा रहे थे।"
जादव का जँगल

"लेकिन जहाँ बहुत सारे पेड़ हों, वहाँ पेड़ों पर रहने वाले जीव-जंतु न हों, ऐसा कैसे हो सकता था? एक जीव से शुरू हुआ यह सिलसिला आगे बढ़ता चला गया।"
जादव का जँगल

"वड़ाः तला हुआ स्वादिष्ट व्यंजन"
कहाँ गये गालों के गड्‌ढे?

"“वहाँ का गेट खुला हुआ था और दरबान गायब था!”"
अम्मा जब स्कूल गयीं

"“क्योंकि रोहन का साँप हमारे पीछे लगा हुआ था!”"
अम्मा जब स्कूल गयीं