PENDING
Edit storybook
Chapter 1/15
editपर्व-त्योहार हमसब को अच्छे लगते हैं। तब ख़ूब मस्ती और शरारत करते हैं साथ ही ढेर सारा लज़ीज़ खाना🍲 भी खाते हैं।
editहमारी थालियों और हमारे दिमाग में हलवा-पूरी, खीर-पूरी और श्रीखंड-पूरी की एक ख़ास जगह होती है। छुट्टियों में तो छोले-पूरी या आलू-पूरी सबसे ज़्यादा पसंद किये जाते हैं। पूरी🥞 तलने की ख़ुशबू सब को अपनी ओर खींचती है। कढ़ाई में तैरती पूरी🥞 को देखना भी बहुत दिलचस्प होता है। ज़रा उस सुनहरे रंग🎨 की करारी, गर्मागर्म फूली-फूली पूरी🥞 को तो देखिये। थाली में रखते ही सबसे गोल और सबसे फूली पूरी🥞 को लेने की हम कोशिश करते हैं।
editहम अक्सर सोचते हैं कि पूरी🥞 फूलती क्यों है?
editक्या उसके अंदर हवा🌬️🍃💨 भरी होती है? पूरी🥞 के अंदर हवा🌬️🍃💨 कौन भरता है?
editहमने देखा है कि गुब्बारे के अंदर मुँह से हवा🌬️🍃💨 भरने के बाद वह फूल जाता🚶 है। पिताजी अपनी साइकिल के टायर में पंप से हवा🌬️🍃💨 भरते है।
Chapter 2/15
editChapter 3/15
editलेकिन माँ👩 अपनी पूरी🥞 को फूलाने के लिये ऐसे किसी भी तरीके का इस्तेमाल नहीं करती है – कमाल की बात👄 है!
editतो चलो आज जब अम्मा👩 पूरी🥞 तल रही होंगी तब हम इसी के बारे में देखेंगे, जानेंगे, पूछेंगे और पता लगायेंगे।
Chapter 4/15
editएक बड़े से बर्तन में अम्मा👩 ने थोड़ा-सा आटा लिया। उन्होंने उसमें थोड़ा-सा तेल और नमक डाला और फिर थोड़ा-सा पानी🌊🌧️💦💧🚰 मिलाया।
editलेकिन आटा इतनी जल्दी सारा पानी🌊🌧️💦💧🚰 कैसे सोख रहा है!
editइसकी वजह यह है कि इस आटे🌯 में कुछ है जिसे बहुत प्यास लगी है! आप को जब प्यास लगती है तो आप क्या करते हैं? आप पानी🌊🌧️💦💧🚰 पीते हैं।
editआटे🌯 में दो तरह के प्रोटीन होते हैं - ग्लाइडीन और ग्लोटेनिन। इन दोनों प्रोटीन के अणुओं को बहुत प्यास लगती है।
editआटे🌯 में जैसे ही पानी🌊🌧️💦💧🚰 डाला जाता🚶 है, यह अणु उसे पी लेते हैं। वे पानी🌊🌧️💦💧🚰 पीने के बाद बड़े और मोटे हो जाते हैं। वे फैल जाते हैं। ज़ाहिर है कि उनके पास आराम से बैठने के लिये जगह नहीं होती है – इसलिए वह एक दूसरे को छूते हैं और धक्कामुक्की करते हैं। वे एक दूसरे से चिपक जाते हैं।
Chapter 5/15
editकभी-कभी खेलते समय📅 आप भी एक दूसरे का हाथ पकड़ कर एक क़तार बनाते हैं और फिर वह पूरी🥞 क़तार ही एक साथ चलती है। उसी तरह कण भी एक दूसरे के साथ चिपक कर एक नेटवर्क सा बना लेते हैं।
Chapter 6/15
editअम्मा👩 ने आटे🌯 को गूँध लिया है। वह अब अपनी हथेली में थोड़ा सा तेल लगा कर उसे अच्छी तरह गूँधने के लिये कह रही है। आटे🌯 को अच्छी तरह गूँधने के लिये मजबूत हाथ चाहिए। उनका कहना है कि अगर आटे🌯 को अच्छी तरह गूँधा नहीं जाता🚶 है तो पूरी🥞 नहीं फूलती है।
editओह, लेकिन यह दोनों बातें भला कैसे जुड़ी हुई हैं?
editजब हम आटे🌯 को गूँधते हैं तो एक दूसरे से चिपके कण, फैलने लगते हैं और फिर इस तरह फैलने के बाद एक नया प्रोटीन बन जाता🚶 है, जिसे कहते हैं ग्लूटेन। ग्लूटेन, रबर की तरह लचीला होता है, इसलिए गूँधे हुये आटे🌯 को हम कोई भी आकार दे सकते हैं।
editइस गूँधे हुये आटे🌯 को अम्मा👩 थोड़ी देर के लिये एक तरफ़ रख देती हैं। अब वह खीर बना रही हैं जैसे ही वह पूरियाँ बेलना शुरू करेंगी, हम वापिस आ जायेंगे।
Chapter 7/15
editअम्मा👩 और बाबा👨 दोनों तैयार हैं। अम्मा👩 ने कढ़ाई चढ़ा (फ्राई पैन चढ़ा) कर उस में थोड़ा तेल डाल दिया है। वह गूँधे हुये आटे🌯 से थोड़ा सा आटा लेती हैं। अब वह एक पूरी🥞 बेल रही हैं। गर्म तेल में पूरी🥞 को डालते हैं। थोड़ी देर में पूरी🥞 फूल जाती है।
Chapter 8/15
editदर असल पूरी🥞 के साथ यह होता है - गूँधे हुये आटे🌯 में ग्लूटेन होने की वजह से उसे बेला जा सकता है। जब इस आटे🌯 की एक छोटी सी लोई को बेला जाता🚶 है तो पूरी🥞 में ग्लूटेन की एक सतह बन जाती है।
editऔर जब पूरी🥞 को गर्म तेल में डालते हैं तो उसकी निचली सतह तेल की वजह से बहुत गर्म हो जाती है।
editयाद है न कि आटे🌯 को गूँधने के लिये इस में पानी🌊🌧️💦💧🚰 मिलाया गया था? ज़्यादा तापक्रम की वजह से पूरी🥞 के अंदर का पानी🌊🌧️💦💧🚰 भाप बन कर उड़ जाता🚶 है। यह भाप बहुत ताकतवर होती है और इससे ग्लूटेन की सतह ऊपर चली जाती है। इसी वजह से पूरी🥞 फूलती है।
editबाबा👨 अब पूरी🥞 को पलट देते हैं ताकि वह दूसरी तरफ़ से भी सुनहरी हो जाये। उन्होंने कढ़ाई से पूरी🥞 निकाल ली है और उसे एक बर्तन में रख दिया है।
Chapter 9/15
editअब एक कांटे की मदद से पूरी🥞 में एक छेद करते हैं। देखा, भाप कैसे बाहर निकल रही है। फूली हुई पूरी🥞 में हवा🌬️🍃💨 नहीं होती। उसमें भाप होती है, समझ गये!
Chapter 10/15
editभेल पूरी/ आलू🥔 दही पूरी🥞 में इस्तेमाल होने वाली पूरियाँ क्यों नहीं फूलतीं?
editआप ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि भेल-पूरी और दही-पूरी में इस्तेमाल होने वाली पूरियाँ फूली नहीं होती है।
editइसकी तीन वजहें हो सकती हैं -
editपूरी🥞 बहुत पतली बेली गई है, और उसमें सही मात्रा में पानी🌊🌧️💦💧🚰 नहीं डाला गया है जिससे भाप और प्रेशर बन सके और पूरी🥞 फूल सके।
editकभी-कभी पूरी🥞 को बेलने के बाद उस में जानबूझ कर एक कांटे से छोटे-छोटे छेद किये जाते हैं ताकि तलते समय📅 जो भाप बने वह छेद से बाहर निकल जाये। इसी वजह से पूरी🥞 फूल नहीं सकती।
editइसके अलावा अगर पूरियों को कम तापक्रम पर तला जाता🚶 है तो उनमें भाप बहुत धीरे-धीरे बनती है, प्रेशर ठीक से नहीं बनता और फिर पूरी🥞 फूल नहीं पाती।
Chapter 11/15
editगेहूं के आटे🌯 से ग्लूटेन कैसे पाया जाता🚶 है?
editपानी🌊🌧️💦💧🚰 की मदद से आटा गूँध लेते है। आटे🌯 को गूँधते समय📅 बस🚌🚍🚏 इतना ही पानी🌊🌧️💦💧🚰 डाले कि आटा न बहुत कड़ा हो और ना ही बहुत मुलायम। हथेली के निचले हिस्से की मदद से कुछ मिनट तक इसे थोड़ा और गूँधते है। चाहें तो, थोड़ा सा तेल भी इस्तेमाल कर सकते है जिससे गुँधा आटा आपके हाथ में चिपके नहीं। गुँधे आटे🌯 को करीब 10 मिनट तक ढ़क कर रख देते है। अब इस गुँधे आटे🌯 को, कुछ मिनट के लिए दोबारा गूँधते है।
Chapter 12/15
editअब फिर इसे एक बड़े बर्तन में रख देते है अब बर्तन के अंदर रखे गूँधे आटे🌯 पर इतना पानी🌊🌧️💦💧🚰 डालते है जिससे वो उसमे डूब जाए। पानी🌊🌧️💦💧🚰 के अंदर डूबे आटे🌯 को गूँधते रहते है जब तक पानी🌊🌧️💦💧🚰 का रंग🎨 सफ़ेद नहीं हो जाता।🚶 इस पानी🌊🌧️💦💧🚰 को फैक कर बर्तन में थोड़ा और ताजा पानी🌊🌧️💦💧🚰 लेते है इसे तब तक करते रहे जब तक गुँधे आटे🌯 को और गूंधने से पानी🌊🌧️💦💧🚰 सफ़ेद नहीं होता। इसका मतलब यह है कि आटे🌯 का सारा स्टार्च खत्म हो गया है और उसमें बस🚌🚍🚏 ग्लूटेन ही बचा है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्टार्च पानी🌊🌧️💦💧🚰 में घुल जाता🚶 है लेकिन ग्लूटेन नहीं घुलता। अब इस बचे हुए आटे🌯 यानि ग्लूटेन से थोड़ा सा आटा लेते है इसे हम एक रबड़बैंड कि तरह खीच सकते है। अगर इसे खीच कर छोड़ते है तो यह वापस पहले जैसा हो जाता🚶 है। इससे इसके लचीलेपन का पता चलता है आप इसे चोड़ाई में फैला सकते है इससे पता चलता है कि इसमें कितनी प्लाटीसिटी है।
Chapter 13/15
editChapter 14/15
editपूरी🥞 से जुड़ा इतिहास वैज्ञानिको का मानना है कि सबसे पहले करीब 11,000 साल पहले मिडिललिस्ट देशो में जंगली गेहूं के होने का पता चला था।
editविश्व के सबसे पहले एनसाइक्लोपीडिया, “अभिलाषितार्थ चिंतामणि” या मनासोललास जिसे राजा👑🤴 सोमेश्वर ने 12 सदी में लिखा था, के अनुसार उस समय📅 में पूरी🥞 जैसी कोई चीज बनाई जाती थी जिसे पहालिका कहा जाता🚶 था तो पूरी🥞 कम से कम 800 साल पुरानी है।
editसीरिया मे दमसकस के पास की गई खुदाई से पता चलता है कि गेहूँ का इतिहास करीब 9000 साल पुराना है इसी जगह पर, गेहूं को बोने और उसकी फसल को काटने और साथ ही उसे पीसने के लिए जरूरी औज़ार भी मिले है।
Chapter 15/15
editक्या ज्वार, बाजरे या चावल के आटे🌯 से पूरियाँ बन सकती है, अगर नहीं तो क्यों? गेहूँ के आटे🌯 से पूरियों के अलावा हम और क्या चीज़ें बना सकते हैं? अगर आटे🌯 में ज़्यादा पानी🌊🌧️💦💧🚰 डाल दिया जाये तो क्या होगा? अगर हम आटे🌯 को खाना🍲 पकाने के दूसरे तरीकों, जैसे तंदूर या तवा पर पकाते हैं तो क्या होता है?
Peer-review 🕵🏽♀📖️️️️
Contributions 👩🏽💻
Deleted storybook paragraph in chapter 2 (🤖 auto-generated comment)
Word frequency
Letter frequency
| Letter | Frequency |
|---|---|
| े | 405 |
| ा | 361 |
| ह | 288 |
| क | 258 |
| र | 237 |
| ी | 237 |
| त | 209 |
| स | 207 |
| ल | 161 |
| न | 153 |
| ं | 142 |
| प | 140 |
| ै | 136 |
| ो | 134 |
| म | 117 |
| ू | 111 |
| ि | 104 |
| ब | 98 |
| ् | 90 |
| य | 80 |
| ग | 79 |
| ज | 74 |
| ट | 66 |
| द | 65 |
| आ | 47 |
| इ | 44 |
| अ | 43 |
| व | 43 |
| ु | 43 |
| च | 38 |
| ए | 31 |
| औ | 30 |
| थ | 30 |
| ँ | 28 |
| भ | 28 |
| फ | 27 |
| ख | 26 |
| ध | 25 |
| उ | 24 |
| ड़ | 23 |
| छ | 19 |
| - | 19 |
| ड | 16 |
| ई | 14 |
| श | 11 |
| ज़ | 10 |
| 0 | 9 |
| ढ़ | 6 |
| ण | 5 |
| 1 | 4 |
| फ़ | 4 |
| ओ | 3 |
| ख़ | 3 |
| ऐ | 2 |
| – | 2 |
| घ | 2 |
| झ | 2 |
| ठ | 2 |
| क़ | 2 |
| ऊ | 1 |
| ञ | 1 |
| ढ | 1 |
| / | 1 |
| 2 | 1 |
| ष | 1 |
| 8 | 1 |
| 9 | 1 |
| ौ | 1 |