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Chapter 1/17
editआज का दिन🌤️ बड़ा ख़ास था। रज़ा ने अपने सबसे बढ़िया कपड़े👗💃 पहने हुए थे। आज उसकी मुलाकात एक बड़ी आला हस्ती से होने वाली थी-बादशाह जलालुद्दीन अकबर से! मुग़ल सल्तनत के महान सम्राट!
editरज़ा के अब्बा, रहमत खान, भी कोई छोटे-मोटे आदमी नहीं थे। वह बादशाह के शाही दर्ज़ी थे। बादशाह उन्हीं के हाथ के अंगरखे पहनना पसंद करते थे-जी हाँ, चुस्त चूड़ीदार पायजामा और ढीला कोटनुमा कुरता-जिसे अंगरखा कहते हैं। यही थी बादशाह की पसंद की पोशाक।
editआज सुबह रज़ा और उसके अब्बा, फ़तेहपुर सीकरी के महल जा रहे थे। बादशाह के गर्मी के मौसम के अंगरखे उन्हें दिखलाने थे। कपड़ों के मामले में राजा👑🤴 साहब काफ़ी नखरैले थे। रहमत खान ने बड़ी मेहनत से अंगरखे बनाये थे-देर रात🌃 तक कटाई और सिलाई करी थी। रज़ा ने भी उनका हाथ बँटाया था-सबसे बारीक सुईं और बेहतरीन रेशम के धागे से महीन टाँके लगाये थे।
Chapter 2/17
editChapter 3/17
editकबूतरों की गुटरगूँ सुनते हुए, दोनों फ़तेहपुर सीकरी के महल पर पहुँचे। भाले लिये दो पहरेदार, फाटक पर तैनात थे।
edit”मैं हूँ रहमत खान, जहाँपनाह का दर्ज़ी। उनके अंगरखों के नये जोड़े लाया हूँ,“रज़ा के अब्बा ने कहा।
editबड़ी मूँछों वाले पहरेदार ने भँवें सिकोड़ीं,”क्या बादशाह को मालूम है कि तुम आने वाले हो?“
edit” जी हुज़ूर, उन्होंने खुद नमूने पसंद किये थे।“
edit”यहीं ठहरो। मैं शाही खिदमतगार को बुलाता हूँ,“पहरेदार ने अन्दर का रुख किया।
editपहरेदार एक और आदमी को लेकर आया जिसे देखकर रहमत ने झुक कर सलाम किया, “गर्मी के कपड़े👗💃 लाया हूँ, धनी💰 जी।”
edit”अच्छा! आओ मेरे साथ। महाराज अभी सोने के कमरे में हैं। शाही दरबार में जाने से पहले तुमसे मिलेंगे।“
Chapter 4/17
edit”ख्वाबगाह?“
edit”बादशाह का निजी महल, जहाँ उनकी बैठक और सोने का कमरा है।“
editकाफ़ी लम्बा रास्ता था। रज़ा ने चारों तरफ़ देखा तो उसकी आँखें आश्चर्य से खुली की खुली रह गईं। मुग़लों के महल कितने सुन्दर थे! पतले नक्काशीदार खम्भे और मेहराब-सब लाल🔴 रंग🎨 के बालुकाश्म से बने हुए। कहीं कहीं फुलवारी वाले बग़ीचे, जिनमें कमलों से सजे तालाब और झिलमिलाते फव्वारे नज़र आ रहे थे। रज़ा ने मन से सोचा कि जन्नत ऐसी ही होती होगी।
editबादशाह के कमरे के दरवाज़े पर इन्तज़ार करते हुए रज़ा ने धनी💰 सिंह को ध्यान से देखा। दर्ज़ी का बेटा👦 होने के नाते सबसे पहले कपड़ों पर नज़र टिकी। लाल🔴 और स़फेद, फूलदार सूती अंगरखा और स़फेद चूड़ीदार। धनी💰 सिंह की नागरा की जूतियों की नोक अन्दर की तरफ़ उमेठी हुई थी। उनकी कमर पर कपड़े👗💃 की पट्टी बँधी हुई थी जिसे पटका कहा जाता🚶 है। पर रज़ा को सबसे ज़्यादा पसन्द उनकी चटख़ लाल🔴 रंग🎨 की पगड़ी आई, जिस पर स़फेद और पीले चौरस और बुंदकियों का नमूना था।
Chapter 5/17
editChapter 6/17
edit”आपकी पगड़ी बड़ी अच्छी है, धनी💰 जी,“वह बोला,”बड़ा सुन्दर नमूना है।“
edit”शुक्रिया! मैं राजपूत हूँ और इस नमूने को मेरे देश में बाँधनी कहते हैं।“
editकमरे में घुसते हुए रज़ा का दिल ज़ोर से धड़क रहा था। मेहराबदार दरवाज़ों से धूप अन्दर आ रही थी। नगीनों के रंगों वाला मोटा, रेशमी पर्शियन कालीन, उसकी रोशनी में रंग🎨 बिखेर रहा था। कमरे में एक ख़ूबसूरत नक्काशीदार पलंग और दो बड़ी सुन्दर कुर्सियाँ थीं। कम ऊँचे पलंग पर रेशमी ओर सुनहरी गद्दियाँ पड़ी थीं। पर्दे भी रेशमी थे!
editरज़ा ने झुक कर सलाम किया और फिर अपने बादशाह की तरफ़ देखा। एक खिदमतगार हाथ में डिब्बा लिये खड़ा था और अकबर उसमें से गहने चुन रहे थे। कद में बहुत लम्बे नहीं थे पर उनके एक तलवारबाज़ के जैसे चौड़े कन्धे थे। बड़ी बड़ी, थोड़ी तिरछी आँखें, नीचे की ओर मुड़ी मूँछें और ओठों के ऊपर एक छोटा सा तिल था।
Chapter 7/17
editउनके आने की आहट पाते ही अकबर पलट कर मुस्कराये,”आओ रहमत! अंगरखे लाये हो? और यह लड़का कौन है तुम्हारे साथ?“
edit”क्या तुम भी सिलाई जानते हो, रज़ा?“
edit”सीख रहा हूँ, हुज़ूर,“रज़ा ने घबराया-सा जवाब दिया,”पर कपड़ा काटने में अभी भी गलती हो जाती हैं।“
edit”सीख जाओगे। तुम्हारे अब्बा सिखला देंगे तुम्हें,“अकबर प्यार से बोले।
editरहमत ने पोटली खोली और अंगरखे पलंग पर सजा दिये। बेहतरीन मलमल से बने हुए थे और बड़ी बारीक कढ़ाई थी। सभी गर्मी के हल्के रंगों में थे, नींबुई, आसमानी, धानी, हल्का जामनी और झकाझक स़फेद। रज़ा जानता था कि बादशाह का पसंदीदा रंग🎨 स़फेद था।
editरहमत ने अकबर को एक स़फेद अंगरखा पहनने में मदद करी। धनी💰 सिंह एक बड़ा-सा आईना ले आये और राजा👑🤴 के सामने लेकर खड़े हो गये।
Chapter 8/17
edit”कढ़ाई अच्छी है और...पहनने में भी आरामदेह है,“
editअकबर खुश होकर बोले।
edit”अब ज़रा पटका बाँधो। देखें कैसा लगता है।“
editरहमत ने कई पटके उठाये और अकबर की कमर पर एक आसमानी रंग🎨 का पटका ऐसे बाँधा कि झालरदार सिरे आगे की तरफ़ लटकें।
edit”नहीं,“अकबर अनख कर बोले,”ज़्यादा हल्का रंग🎨 है... हमें ज़रा शोख रंग🎨 चाहिये।“
editरज़ा और उसके अब्बा ने, एक के बाद एक कई पटके बाँध कर दिखाये-हरा और पीला, नारंगी और जामनी, पर अकबर को कोई भी न सुहाया।
edit”हमें ये रंग🎨 जँच नहीं रहे, रहमत!“अकबर ज़रा तुनक कर बोले।
Chapter 9/17
editChapter 10/17
editरज़ा ने देखा कि अब्बा के माथे पर परेशानी झलक रही थी। हाय, अगर बादशाह सलामत को पटके पसन्द नहीं आये तो क्या वे सारे कपड़े👗💃 लौटा देंगे, मुझे फ़ौरन कुछ करना होगा, उसने सोचा।
editउसने यहाँ-वहाँ नज़र दौड़ाई और अनायास बोल पड़ा,”हुज़ूर क्या आप चटख़ लाल🔴 पर स़फेद और पीली बुंदकियों वाला देखना पसन्द करेंगे?“
edit”कैसा लाल🔴 रंग?“अकबर हुंकार कर बोले,”दिखाओ हमें।“
editरज़ा ने धनी💰 सिंह की पगड़ी की ओर इशारा किया,”वैसा लाल?“🔴
edit”हूँ...“अकबर ने धनी💰 सिंह के मूछों वाले चेहरे को घूर कर देखा और कहा,”ठीक है, देखते हैं।“
editरज़ा ने लपक कर धनी💰 सिंह की पगड़ी थामी। उसके लपेटे सीधे करके अकबर की कमर पर बाँध दी।💗 जब तक अकबर आड़े-टेढ़े होकर अपने आप को आईने में निहार रहे थे,
Chapter 11/17
editChapter 12/17
editवह साँस रोके खड़ा रहा। उसने देखा कि धनी💰 सिंह मुस्करा रहे हैं-शायद उन्हें यह देख कर हँसी आ रही थी कि राजा👑🤴 साहब ने उनकी पगड़ी का पटका बना दिया था!
edit”यह रंग🎨 हमें पसंद आया...और नमूना भी बिल्कुल अलग है,“आखिरकार अकबर ने फ़रमाया।
edit”बाँधनी हुज़ूर...राजपूतों के देश से,“रज़ा का जवाब हाज़िर था।
edit”अच्छा! राजपूत! जैसे हमारी महारानी जोधा बाई!“अकबर मुस्कराये।
edit”धनी,💰 रहमत को अंगरखों और पटकों की कीमत अदा कर दो। हमें सारे चाहियें।“
edit”हुज़ूर,“रज़ा सँभल कर बोला,”धनी जी को पगड़ी की ज़रूरत पड़ेगी। हमने उनकी वाली तो ले ली है।“
edit”उन्हें एक पटका दे दो,“अकबर ज़ोर से हँसे।”वह धुले से नीले रंग🎨 वाला। उनकी पगड़ी तो अब हमने रख ली है।“
Chapter 13/17
editChapter 14/17
editइतिहास के कुछ रोचक तथ्य 1. रज़ा, बादशाह अकबर के शासनकाल में अब से 400 साल पहले रहता था। अकबर मुग़ल राजवंश का सबसे महान राजा👑🤴 था। वह एक प्रसिद्ध योद्धा भी था। उसे नये नमूनों के कपड़े👗💃 पहनने का बहुत शौक़ था। वह पतंगबाज़ी और आम खाने🍴 का भी शौकीन था। 2. बाबर, मुग़ल राजवंश का संस्थापक, काबुल का राजा👑🤴 था। उसने 1526 में भारत🇮🇳 पर आक्रमण किया और दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी को पानीपत की लड़ाई में हरा दिया। अकबर, बाबर का पोता था। वह भी एक बड़ा कामयाब सेनापति था और अपने 49 साल के शासन काल में एक भी लड़ाई नहीं हारा।
Chapter 15/17
edit3. दो मुग़ल बादशाहों ने नये शहर बनवाये। अकबर ने आगरा के पास, फ़तेहपुर सीकरी बनवाया और शाहजहाँ ने दिल्ली में, शाहजहाँनाबाद। फ़तेहपुर सीकरी, आज वीरान पड़ा है पर शाहजहाँनाबाद (आज पुरानी दिल्ली कहलाता है) में आज भी लोग रहते हैं और वहाँ ज़िन्दगी की चहल-पहल बरक़रार है।
Chapter 16/17
edit4. शाहजहाँ का मशहूर मयूर सिंहासन (पीकॉक थ्रोन) एक चौकोर चपटा आसन था। उसके हर कोने पर पतले खम्बे थे जो बेशकीमती नगीनों से सजे हुए थे। आसन के ऊपर एक छत्र था जिसके ऊपर नगीनों से जड़ी मोर की आकृति थी। बादशाह इस छत्र के नीचे, रेशमी गद्दियों की टेक लेकर बैठा करता था।
edit5. कई मुग़ल राजकुमारियाँ बहुत पढ़ी लिखी थीं। गुलबदन बेग़म ने अपने पिता, बाबर की जीवनी लिखी। शाहजहाँ की बेटी, जहाँआरा, शायर थीं।
Chapter 17/17
edit6. मुग़लों के महलों में कई रसोईघर थे। हर रसोईघर से बादशाह के लिये खाना🍲 भेजा जाता।🚶 ज़ाहिर है कि जब बादशाह सलामत खाने🍴 बैठते तो वे तीस किस्म की लज़ीज़ चीज़ों में से अपनी पसन्द की चीज़ खाते। ओहो! मुँह में पानी🌊🌧️💦💧🚰 भर आता है मुग़लई खाने🍴 का नाम आने पर- बिरयानी, पुलाओ, कलिया, कोर्मा-यह सब पकवान मुग़लई रसोईघरों से ही निकल कर आये हैं।
Peer-review 🕵🏽♀📖️️️️
Contributions 👩🏽💻
Word frequency
Letter frequency
| Letter | Frequency |
|---|---|
| ा | 500 |
| े | 412 |
| र | 379 |
| क | 337 |
| ह | 260 |
| ी | 250 |
| न | 226 |
| स | 177 |
| म | 168 |
| ब | 159 |
| ं | 158 |
| ल | 154 |
| प | 129 |
| द | 123 |
| ो | 118 |
| त | 112 |
| ् | 97 |
| ि | 92 |
| ु | 89 |
| य | 79 |
| ग | 72 |
| थ | 72 |
| ज | 68 |
| अ | 61 |
| ख | 61 |
| ज़ | 55 |
| श | 54 |
| ड़ | 48 |
| ँ | 46 |
| आ | 46 |
| ू | 43 |
| ै | 42 |
| व | 39 |
| ट | 38 |
| औ | 37 |
| च | 32 |
| ध | 31 |
| उ | 30 |
| ई | 28 |
| ए | 24 |
| भ | 23 |
| - | 16 |
| फ | 15 |
| छ | 14 |
| फ़ | 12 |
| ओ | 11 |
| ौ | 11 |
| ग़ | 11 |
| झ | 8 |
| ठ | 8 |
| ़ | 7 |
| इ | 6 |
| घ | 6 |
| ढ़ | 5 |
| ऊ | 4 |
| ख़ | 4 |
| 4 | 3 |
| ऐ | 2 |
| 0 | 2 |
| 1 | 2 |
| 2 | 2 |
| 5 | 2 |
| 6 | 2 |
| क़ | 2 |
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